Saturday, 16 March 2013

एक कश्ती की कहानी ताबिर की जुबानी...
जिसकी खातिर लिए सीने पे हजारों तूफां,
कोई जाकर उसी साहिल को ज़रा नजदीक ला मेरे...

Friday, 15 March 2013


फुरसतों के चार लम्हे गर मिले ताबिर कभी...

      दो गए अश्कों में बहकर,  

और दो तेरी याद में...

Thursday, 14 March 2013

ये तेरी यादें हैं जो मरने नहीं देती मुझे,  
वरना रक्खा क्या है इस सेहरा की सूखी रेत में...

तुम अपना चेहरा ज़रा ढक के निकला करो इन राहों से,

सुना है चाहने वालों की नज़र बहुत ज़ल्द लगा करती है...

Wednesday, 13 March 2013


वो हमसे प्यार न करें न सही...

हमसे इज़हार न करें न सही...

अब हम को भी उनसे मोहब्बत नहीं ऐ दोस्त... 

वो इस पे ऐतबार न करें न सही...

Tuesday, 12 March 2013


हमने मर के भी तो देख लिया उस गली में,   

वो इक आँसू बहाने भी न आया था वहाँ...